ट्यूबलाइट शेयर जो चमकाएंगे आपका पोर्टफोलियो

कुछ स्टॉक्स ट्यूबलाइट की तरह होते हैं जो देर से चलते हैं, लेकिन जब चलते हैं तो मालामाल कर दे देतें हैं। आज के इस खास शो में हम बता रहें कुछ इसी तरह के टूयूबलाइट शेयर जो आपको मालामाल करने की पूरी संभावना और क्षमता रखते हैं।
सुजलॉन: खरीदें- 18, लक्ष्य – 28, अवधि – 1 साल
सुजलॉन के मार्च तिमाही के नतीजे अच्छे रहे हैं। सरकार के रिन्युएबल एनर्जी पर फोकस से कंपनी को फायदा होगा।
रिलायंस डिफेंस: खरीदें- 60, लक्ष्य – 85, अवधि – 1 साल
डिफेंस, मेक इन इंडिया पर सरकार के फोकस से रिलायंस डिफेंस को फायदा होगा। हाल में कंपनी ने फ्रांस की कंपनी थेल्स के साथ ज्वाइंट वेंचर किया है।
एचडीआईएल: खरीदें- 87, लक्ष्य – 120, अवधि – 1 साल
एचडीआईएल को हाउसिंग पर सरकार के फोकस, रेरा लागू होने से फायदा होगा। अफोर्डिबल हाउसिंग से कंपनी को फायदा होगा।
जीएमआर इंफ्रा: खरीदें- 21, लक्ष्य – 30, अवधि – 1 साल
जीएमआर इंफ्रा को नए एयरपोर्ट बनाने के ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। हाल में कंपनी ने सर्बिया, जमैका में एयरपोर्ट बनाने के लिए बोलियां लगाईं है। इंफ्रा सेक्टर में अच्छे मौके हैं, वित्त वर्ष 2017 में कर्ज 47 फीसदी कम हुआ है।
जिलेट: खरीदें- 4875, लक्ष्य – 5400, अवधि – 1 साल
जिलेट एक मजबूत ब्रांड है जिसमें लगातार अच्छी ग्रोथ देखने को मिल रही है। जीएसटी लागू होने से कंपनी को फायदा मिलेगा।
ऑटोमोटिव एक्सेल्स: खरीदें- 724, लक्ष्य – 1000, अवधि – 1 साल
ऑटोमोटिव एक्सेल्स कल्याणी ग्रुप की कंपनी है जो कमर्शियल वाहनों के पार्ट्स बनाने का काम करती है। कंपनी डिफेंस वाहनों का कारोबार भी करती है।
टीटागढ़ वैगन्स: खरीदें- 115, लक्ष्य – 170, अवधि – 1 साल
टीटागढ़ वैगन्स रेलवे कोच, जहाज बनाने के कारोबार में है। कंपनी डिफेंस वाहनों में इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स बनाने का काम भी करती है। इसकी सब्सिडियरी कंपनी ने ट्रैक्टर बनाने का काम शुरू किया है।

निफ्टी टूटकर 9575 पर बंद, सेंसेक्स 152 अंक लुढ़का

NIFTYलंबे वीकेंड से पहले घरेलू बाजारों में आज मुनाफावसूली देखने को मिली है। सेंसेक्स और निफ्टी 0.5 फीसदी तक गिरकर बंद हुए हैं। आज के कारोबार में निफ्टी ने 9565.3 तक गोता लगाया, तो सेंसेक्स 31110.4 तक टूटा। अंत में निफ्टी 9580 के आसपास बंद हुआ है, जबकि सेंसेक्स 31150 के नीचे ही बंद हुआ है।

आज मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में जमकर बिकवाली देखने को मिली है। बीएसई के मिडकैप इंडेक्स में 1.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि निफ्टी का मिडकैप 100 इंडेक्स 1.25 फीसदी गिरकर बंद हुआ है। बीएसई का स्मॉलकैप इंडेक्स 1.5 फीसदी तक लुढ़ककर बंद हुआ है।

बैंकिंग, ऑटो, मेटल, रियल्टी, कैपिटल गुड्स, कंज्यूमर ड्युरेबल्स, ऑयल एंड गैस और पावर शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली है। बैंक निफ्टी 0.8 फीसदी तक गिरकर 23,542.75 के स्तर पर बंद हुआ है। निफ्टी के पीएसयू बैंक इंडेक्स में 2 फीसदी, ऑटो इंडेक्स में 1.7 फीसदी और मेटल इंडेक्स में 0.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। बीएसई के रियल्टी इंडेक्स में 0.9 फीसदी, कैपिटल गुड्स इंडेक्स में 1 फीसदी, कंज्यूमर ड्युरेबल्स इंडेक्स में 1 फीसदी और ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 1.1 फीसदी की कमजोरी आई है। तकरीबन सभी सेक्टर आज लाल निशान में बंद हुए।

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कमोडिटी बाजार में आज क्या हो रणनीति

COMMODITYचीनी की कीमतें लगातार गिर रही हैं। ग्लोबल मार्केट में चीनी का दाम पिछले 16 महीने के निचले स्तर पर आ गया है और कल घरेलू बाजार में भी चीनी करीब 6 महीने के निचले स्तर पर बंद हुई। वहीं राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में प्री मॉनसून बारिश से कपास की बुआई जोरों पर है। राजस्थान के कई इलाकों में कल से ही रुक रुककर बारिश हो रही है।

 

नॉन एग्री कमोडिटी पर नजर डालें तो कच्चा तेल पिछले 10 महीने के निचले स्तर से संभलने की कोशिश कर रहा है। हालांकि बढ़त के बावजूद नायमैक्स पर क्रूड में 43 डॉलर के नीचे कारोबार हो रहा है। वहीं ब्रेंट का दाम 45.5 डॉलर के नीचे है। वहीं सोने और चांदी में हल्की बढ़त है। चांदी पिछले एक महीने के निचले स्तर से काफी बढ़ चुकी है। आज डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की रिकवरी आई है। एक डॉलर की कीमत 64.55 रुपये के पास है। डॉलर में गिरावट से रुपये को सपोर्ट मिला है।फिलहाल एमसीएक्स पर कच्चा तेल 0.25 फीसदी उछलकर 2785 रुपये पर कारोबार कर रहा है। नैचुरल गैस भी करीब 0.5 फीसदी की तेजी के साथ 188.2 रुपये पर कारोबार कर रहा है। वहीं एमसीएक्स पर सोना 0.2 फीसदी की मामूली बढ़त के साथ 28680 रुपये पर कारोबार कर रहा है। चांदी 0.4 फीसदी की तेजी के साथ 38370 रुपये पर कारोबार कर रही है।

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बेस मेटल्स में कमजोरी का रुख नजर आ रहा है। एमसीएक्स पर कॉपर 0.2 फीसदी गिरकर 370 रुपये के नीचे कारोबार कर रहा है। निकेल 0.25 फीसदी की कमजोरी के साथ 581.3 रुपये पर कारोबार कर रहा है। एल्युमीनियम की चाल सपाट है, जबकि लेड 0.7 फीसदी कमजोर होकर 140.5 रुपये और जिंक 0.5 फीसदी की कमजोरी के साथ 173.1 रुपये पर आ गया है।वहीं एग्री कमोडिटी में एनसीडीईएक्स पर कैस्टर सीड का जुलाई वायदा 0.8 फीसदी की मजबूती के साथ 4190 रुपये पर कारोबार कर रहा है। हालांकि हल्दी का जुलाई वायदा 0.75 फीसदी गिरकर 6200 रुपये के नीचे फिसल गया है। वहीं ग्वार गम का जुलाई वायदा 0.2 फीसदी की बढ़त के साथ 6950 रुपये के आसपास नजर आ रहा है।

 

कैस्टर सीड एनसीडीईएक्स (जुलाई वायदा) : खरीदें – 4160, स्टॉपलॉस – 4050 और लक्ष्य – 4300

 

हल्दी एनसीडीईएक्स (जुलाई वायदा) : खरीदें – 6240, स्टॉपलॉस – 6090 और लक्ष्य – 6600

 

ग्वार गम एनसीडीईएक्स (जुलाई वायदा) : खरीदें – 6900, स्टॉपलॉस – 6750 और लक्ष्य – 7250

 

लेड एमसीएक्स (जून वायदा) : खरीदें – 139, स्टॉपलॉस – 137 और लक्ष्य – 144

 

नैचुरल गैस एमसीएक्स (जुलाई वायदा) : बेचें – 190, स्टॉपलॉस – 196 और लक्ष्य – 180

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These 17 stocks will benefit the most from fall in crude prices

Commodity-TipsRising US Shale production, low oil demand and high inventories have been a triple whammy for crude oil prices which are now trading below USD 45/barrel or some would say has entered the bear territory. Crude oil, also known as black gold made a high of USD 55.24 barrel and now made a low of USD 42.75 barrel, a fall of more than 22 percent in 2017.

“A decline of more than 20 percent from a most recent high is typically considered as a bear market. The last time crude hit a bear market was in August 2016. The ramp-up in US shale oil production raised concerns over the effectiveness of Opec’s supply cuts in balancing the oversupplied market,” D K Aggarwal, Chairman, and MD, SMC Investments and Advisors Ltd told Moneycontrol.

“The shale comeback is displayed by the unrelenting rise in the Baker Hughes rig count. The closely-watched metric has increased 22 weeks in a row — the longest streak since 1987 when the data first started being collected.It is expected that monthly U.S. oil production could hit a new record before the end of the year. As per International Energy Agency, U.S. will lead a surge in non-OPEC supply next year that will outpace growth in global demand.

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